Dev Diwali 2023 : क्यों मनाया जाता है देव दिवाली का त्यौहार? जानें तिथि, इतिहास और महत्व

Dev Diwali 2023

देव दीपावली को वर्ष के सबसे शुभ त्योहारों में से एक माना जाता है। हर साल देव दिवाली (diwali 2023) बड़े ही धूमधाम से मनाई जाती है। देव दिवाली विशेष रूप से वाराणसी, उत्तर प्रदेश और गुजरात के कुछ हिस्सों में मनाई जाती है। जैसे की नाम से स्पष्ट है, देव दिवाली, देवताओं की दिवाली के रूप में जाना जाता है।

देव दीपावली के रूप में भी जाना जाने वाला यह त्योहार दुष्ट राक्षस त्रिपुरासुर के खिलाफ भगवान शिव की जीत का जश्न मनाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव ने राक्षस को हराया था, और इसलिए, देव दिवाली को त्रिपुरा उत्सव के रूप में भी जाना जाता है। देव दिवाली वाराणसी में मनाए जाने वाले सबसे बड़े त्योहारों में से एक है।

आइये जानते है, इस पावन पर्व की देव दिवाली 2023 की तिथि, समय, महत्व और अन्य महत्वपूर्ण अनुष्ठान-

Dev Diwali 2023 Date | देव दिवाली 2023 तिथि

हर साल कार्तिक मास की पूर्णिमा के दिन देव दिवाली मनाई जाती है। द्रिक पंचांग के अनुसार इस साल देव दिवाली 26 नवंबर को होगी. पूर्णिमा तिथि 26 नवंबर को दोपहर 3:53 बजे शुरू होगी और 27 नवंबर को दोपहर 2:45 बजे समाप्त होगी।

Dev Diwali 2023 Muhurat | देव दिवाली 2023 मुहूर्त

प्रदोषकाल देव दीपावली मुहूर्त – शाम 05:08 से रात 07:47
अवधि – 02 घण्टे 39 मिनट्स

प्रदोष काल में इस दिन देव दीपावली मनाई जाती है। इस दिन वाराणसी के मंदिर और गंगा नदी के घाट दीयों की रोशनी से जगमगाते हैं। देव दिवाली के दिन काशी में विशेष प्रकार की रौनक देखने को मिलती है।

Dev Diwali History & Significance | देव दिवाली इतिहास व महत्व

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, दिवाली के शुभ दिन पर देवी-देवता गंगा के पवित्र जल में डुबकी लगाने के लिए पृथ्वी पर आते हैं। सभी देवी-देवताओं के सम्मान में वाराणसी के घाटों को दीपों से रोशन किया जाता है। यह दिन राक्षस त्रिपुरासुर पर भगवान शिव की जीत का भी जश्न मनाता है।

इस दिन लोग अपने घरों को रंगोली और दीयों से सजाते हैं. इसके साथ ही वाराणसी के घाटों को भी दीयों से सजाया जाता है। देव दिवाली (dev diwali 2023) गंगा आरती इस त्योहार का मुख्य आकर्षण है। इस दिन 24 पुजारी और 24 युवा भक्तिभाव से गंगा आरती करते हैं। इस समय के दौरान, तीर्थयात्री अपनी श्रद्धा अर्पित करने के लिए वाराणसी आते हैं। आसमान को आतिशबाजी से सजाया जाता है और भव्य शोभा यात्रा भी निकाली जाती है।

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