क्या आप भी बने है नए Parents, तो आज ही अपनाएं Sudha Murthy के ये कमाल Parenting Tips!

Sudha Murthy's parenting tips

भारतीय उद्यमी और इंफोसिस फाउंडेशन की प्रमुख सुधा मूर्ति कई लोगों के लिए एक आइडियल मानी जाती है। जब उनके पेरेंटिंग से जुड़ें कोई भी सुझाव सामने आते है, तो उसमें भारतीय मान्यताएं, नैतिकताएं और रीति-रिवाज की झलक दिखाई देती है।

माता-पिता बनना एक अद्भुत अनुभव है। यह हर व्यक्ति के जीवन के सबसे अच्छे पलों में से एक है। लेकिन यह खुशी के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी साथ लाता है। ऐसे में हर नए माता-पिता के लिए कई बातें जानना बेहद जरूरी है।

इसे ध्यान में रखते हुए, शिक्षक, लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता सुधा मूर्ति ने हाल ही में नई पीढ़ी के माता-पिता के लिए कुछ पेरेंटिंग टिप्स साझा किए हैं जो बच्चों के पालन-पोषण में बहुत मददगार हैं। आइए जानते है सुधा मूर्ति जी द्वारा सुझाई गई ये पेरेंटिंग (Parenting Tips) टिप्स-

Sudha Murthy Parenting Tips: सुधा मूर्ति के पेरेंटिंग टिप्स

अपने सपने न थोपें

सुधा मूर्ति का कहना है कि माता-पिता होने के नाते हमें अपने बच्चों पर अपने सपने नहीं थोपने चाहिए। क्योंकि सभी बच्चे एक जैसे नहीं होते, हर एक अलग होता है और उसके अपने-अपने सपने होते हैं। इसलिए, माता-पिता के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि उनके विचार और रुचियाँ कहाँ हैं।

एकदम से कुछ भी न खरीदें

जब कोई बच्चा आपसे कुछ मांगे तो पहले यह समझने की कोशिश करें कि उसे इसकी कितनी जरूरत है। अगर इस समय किसी वस्तु की जरूरत न हो तो सिर्फ इसलिए न खरीदें कि बच्चा जिद्दी है। इस तरह आप उन्हें पैसे और चीज़ों की कीमत समझने में मदद कर सकते हैं।

बच्चों की गैजेट्स से दूर रखें

आजकल बच्चे सेलफोन पर ज्यादा समय बिताते हैं। ऐसे में उनका ध्यान किताब की ओर जाना चाहिए. आप उसके साथ बैठें, कहानियाँ सुनाएँ, किताबें पढ़ें। उन्हें बुक्स से कनेक्ट करना सिखाएं।

बड़ो का सम्मान करना सिखाएं

सुधा मुर्ति कहती हैं कि बच्चों को बड़ों का सम्मान करना सिखाएं. उसे बताएं कि घर के बड़े बुजुर्ग उनके लिए कितना मायने रखते हैं. उन्हें मोरल स्टोरी के माध्यम से समझाने की भी कोशिश कर सकती हैं.

बच्चों की तुलना करने से बचें

अधिकांश माता-पिता अपनी तुलना दूसरे बच्चों से करते हैं। आपको यह समझना होगा कि हर बच्चे में अलग-अलग क्षमताएं होती हैं। इससे आपके बच्चे का आत्मविश्वास कमजोर हो सकता है, जो भविष्य में अवसाद का कारण बन सकता है।

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